Saturday, 16 January 2010

समीक्षा: पा की कहानी में दम नहीं है

फिल्म पा में कोई कहानी ही नहीं है.  अमिताभ के लिए एक ख़ास किरदार सोचा गया और फिर उसके इर्दगिर्द एक अविश्वसनीय कहानी बुन दी गयी.  कहानी फिर भी छोटी पड़ी तो अभिषेक बच्चन के किरदार को युवा नेता बना कर राजनीती पर टिप्पणियां की गयी जिसका बाकी कहानी से कोई सरोकार नहीं है.  फिर भी फिल्म किसी-ना किसी तरह दर्शकों को बांधे रखती है.  फिल्म अगर डेढ़ घंटे की बनाते तो शायद बहुत अच्छी बनती.  अमिताभ का मेकअप अच्छा है.  अभिनय ठीक है.  कोई शिकायत नहीं पर तारीफ़ करने जैसा भी कुछ नहीं.  अभिषेक और विद्या बालन अच्छे लगते हैं.  परेश रावल का काम ना के बराबर है.

रेटिंग: ***

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